25 अक्तूबर 2010



ग़ज़लकार कुवंर  कुसुमेश के स्वर में 

उनकी ग़ज़ल : हर शाम छलकते हैं पियाले कहीं-कहीं



                                 ग़ज़लकार कुवंर कुसुमेश अपने अध्ययन-कक्ष में



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                                  ग़ज़लकार कुवंर कुसुमेश रचना-पाठ करते हुए



03 अक्तूबर 2010

गजल : आ सको आना भला ये भी बुलाना ........



प्रसिद्द साहित्यकार -रवीन्द्र कुमार ’राजेश’
के स्वर में उनकी गजल का आस्वादन
कीजिए।

प्रस्तोता -डॉ० डंडा लखनवी




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02 अक्तूबर 2010

मत बारूदी खेल से........


कुंडलीकार श्री रामाऔतारपंकजकी
दो कुंडलियाँ उन्हीं के स्वर में सुनिए।

प्रस्तोता -डॉ० डंडा लखनवी








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