10 अप्रैल 2011

******भ्रष्टाचार : तेरे रूप बेशुमार

                                           -डॉ० डंडा लखनवी

भ्रष्टाचार की जड़ें सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में व्याप्त हैं। इस रोग से सारा देश पीड़ित है। श्री अन्ना हजारे ने उसके उपाचार का बीड़ा उठाकर सोए हुए भारतीय समाज में हलचल पैदा कर दी है। सदियों से व्यंग्यकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनमत बनाते रहे हैं। व्यंग्य का कार्य ही है समाज में पर्दे के पीछे हो रहे लोक विरोधी कार्यों को सामने लाना है। इससे समाज में जागरूकता उत्पन्न होती है। असमाजिक तत्वों का हौसला पस्त होता है। समाज में मानवीय मूल्य स्थापित होते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होता है। व्यंग्यकार इस काम को स्वत:स्फूर्त होकर करता है। व्यंग्यकार का काम जोखिम भरा है। साहित्य की अन्य विधाओं में इतना जोखिम नहीं है। कबीर ने उस जोखिम को उठाया था। कबीर का नाम हिंदी साहित्य में बड़े आदर के साथ लिया जाता है। व्यंग्य की तेज छूरी से उन्होंने ने सामाजिक शल्य-चिकित्सा बड़े कौशल से की थी। आज व्यंग्य का फलक और उसका स्वरूप बहुत विस्तृत हो चुका है।

आधुनिक काल में व्यंग्य की एक स्वतंत्र विधा के रूप में पहचान बन चुकी है। व्यंग्य भ्रष्टाचार से लड़ने का कारगर हथियार है। यह भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों के लिए जमीन तैयार करता है। जिस तरह से खद्दर के वस्त्र पहन भर लेने से कोई व्यक्ति सच्चा-जनसेवी नहीं बन जाता है उसी तरह से साधुओं जैसा मेकअप कर लेने से व्यक्ति चरित्रवान नहीं बन जाता है। धर्म और राजनीति का रिस्ता चोली और दामन जैसा रहा है। धर्म और चरित्र दोनों की प्रकृति अलग-अलग है। यदि ध्रर्म व्यक्ति को चरित्रवान बनाता तो विभिन्न धर्मों में परस्पर संघर्ष न होते और न सांप्रदायिक इकाईयों के अलग-अलग धड़ों में परस्पर टकराव होते। धर्मभीरुता चरित्रवान होने की गारंटी नहीं है। कोई भी धर्म न ही अपने समस्त अनुयायियों के चारित्रिक शुद्धता का दावा कर सकता है।

चरित्र मानवीय-मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से सवंरता है। चरित्रवान के लिए आत्म-निरीक्षण और अवगुणों से छुटकारा पहली शर्त है। संयम और त्याग की आँच पर ख़ुद को तपाना पड़ता है। हरामख़ोरी से बचना होता है। दूसरों के साथ वही व्यवहार करना पड़ता है जैसा हम अपने लिए दूसरों से चाहते हैं। चरित्र बाहरी दिखावा नहीं अभ्यांतरिक शुद्धता है। चरित्र व्यक्ति के आचरण और व्यवहार से झलकता है।

@ चरित्र-प्रमाण पत्र की सभी को आवश्यकता पड़ती है। आपको भी पड़ी होगी। क्या कभी आपने सोचा है कि जो व्यक्ति आपको चरित्र प्रमाण-पत्र जारी कर रहा है वह चरित्र के मामले में पूर्ण रूपेण खरा है? वह कदाचारी भी हो सकता है। कई बार आप उसके चरित्र के विषय में जानते भी होंगे। कदाचारी व्यक्ति सदाचार का प्रमाण-पत्र का प्रमाण-पत्र जारी करता है? यह कैसी विडंबना है?

@ रिश्वतख़ोर व्यक्ति को जब खरी-खोटी सुनाई जाती है तो वह कहता है-"आपको मौका नहीं मिला है इसलिए ऐसी बातें करते हो।" यह कह कर वह कहना चाहता है -"उसे मौका मिला है। वह अपनी मर्जी का मालिक है। वह जो चाहे सो करे उस पर कोई उंगली न उठाए।"

@ सभी लोग जानते हैं कि दहेज एक सामाजिक अभिशाप है। इसे रोकने के लिए कानून भी बना है। कानून किनारे धरा है। महंगी शादियों का मीडिया द्वारा भोड़ा प्रदर्शन खूब किया जाता है। सबको दिखाकर दहेज लेना और देना बदस्तूर जारी है। यह कैसी ईमानदारी है?

@ एक व्यंग्यकार से प्रश्न किया गया कि आजकल भ्रष्टाचार का ग्राफ ऊँचा क्यों है? उसका उत्तर था कि अधिकांश लोग चाह्ते हैं कि सरदार भगतसिंह यदि पुर्न जन्म लें तो पड़ोसी के घर में लें और माइकेल जैक्शन अथवा नटवर लाल उनके घर में। अत: अगर कोई आफ़त आवे तो पड़ोसी के घर में आवे और उसका घर सुरक्षित रहे।
                                                        अन्ना हजारे.....जिन्दाबाद!

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपने ठीक फरमाया
    यहाँ चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने वालो के ही चरित्र ठीक नही

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  2. जिस तरह से खद्दर के वस्त्र पहन भर लेने से कोई व्यक्ति सच्चा-जनसेवी नहीं बन जाता है उसी तरह से साधुओं का मेकअप कर लेने से व्यक्ति चरित्रवान नहीं बन जाता है। धर्म और चरित्र दोनों की प्रकृति अलग-अलग है......bahut khoob bahut achcha likha hai aapne.dahej pratha kya khatm ho paayegi???abhi bhi shaq hai.

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  3. सर पिछले पोस्ट में आप ने जो मार्गदर्शन दिया है उसके लिया बहुत बहुत आभार
    अब इस पोस्ट में कुछ अपने विचार दीजिये

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  4. आदरणीय श्री डंडा लखनवी जी
    सादर नमस्कार !

    मैं आपसे सहमत हूँ. अन्ना हज़ारे जी को नमन, जो उन्होंने भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म करने का बीड़ा उठाया है.
    आपको मर्यादा पुरषोत्तम भगवान् श्री राम के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  5. danda ji apaka kathan sahi hain lakin sadhak apna
    charitra ap hi savarta hain use kisi anya se pramadpatra ki avashakta nahi hoti | charitra pramad patra samanya logo ka dhakosla matra hain.kisi ke dwara prapta kiya gaya pramdpatra kisi ne prapt kiya ho vah jhoota hi hota hai|

    tuka ram verma

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  6. 'चरित्र मानवीय ........झलकता है'में ही सारा निचोड़ है भ्रष्टाचार दूर करने का.

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  7. सार्थक, सुन्दर .. पोस्ट ..शुभकामनायें

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