17 अप्रैल 2011

भारतीय संस्कृति का अनूठा उत्पाद : कास्टोमीटर

   
                     -डॉ० डंडा लखनवी

जिस तरह से वाहनों गति नापने के लिए स्पीडोमीटर, शरीर का ताप नापने के लिए थर्मामीटर, दूध की शुद्धता नापने के लिए लैक्टोमीटर का प्रयोग होता है ठीक उसी तरह व्यक्ति की योग्यता नापने के लिए भारत में "कास्टोमीटर" प्रयोग में लाया जाता है। यह भारतीय संस्कृति का अनूठा उत्पाद है। इस यंत्र के पैरामीटर का सारा प्रोग्राम कुलीनता के सिद्धान्त पर कार्य करता है। व्यक्ति योग्य है अथवा अयोग्य, विद्वान है अथवा मूर्ख, मेहनती है अथवा आलसी, बहादुर है अथवा कायर इत्यादि  की  जानकारी हासिल करने करने के लिए यह यंत्र बड़ा कारगर है। इसमें व्यक्ति की शैक्षिक योग्यताओं का डाटा डालने वाला बटन नहीं होता है। इस  यंत्र  को  व्यक्ति के तत्कालीन पद एवं प्रतिष्ठा में रूचि नहीं होती है अपितु उसके पुरखों के धंधों को सूंघने में बड़ी रुचि होती है। प्रतिभा के मूल्यांकन में इसे चरित्र प्रमाण-पत्र की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। आदमी ईमानदार है अथवा बेईमान इसका इस यंत्र से कोई मतलब नहीं। यह यंत्र व्यकित की कास्ट देखता है और कुछ  नहीं। इसलिए इस यंत्र का नाम कास्टोमीटर पड़ा है   
 
कास्टोमीटर नामक यंत्र का प्रयोग बड़ा आसान है। बस! व्यक्ति की जाति पूछिए और कास्टोमीटर में फीड कर दीजिए। अब आपका काम ख़त्म हो गया।  यंत्र काम करना शुरू करेगा। इसकी सुई नीच अथवा ऊँच की डिग्री के अनुसार ऊपर-नीचे सरकने लगती है। यदि यंत्र की सुई ऊपर की ओर खिसके तो समझ जाइए व्यक्ति  के पुरखों के पास कुलीनता का ठेका था और वह योग्य एवं  ईमानदार है। यदि यंत्र की सुई नीचे की ओर खिसके तो समझिए कि व्यक्ति के पुरखे कुलीनता की धंधेंबाजी में नहीं फंसे थे इसलिए वह नीच, अयोग्य तथा बेईमान है। यदि यंत्र की सुई मीटर के मध्य में अथवा उसके आसपास ठहरे तो समझिए कि प्रतिभा में नीच और ऊँच दोनों का मेल  है।

कास्टोमीटर यह भी तय कर देता है कि अमुख व्यक्ति को कितना सम्मान देना है अथवा उसका कितना अपमान करना है। कास्टोमीटर बताता है कि व्यक्ति को बैठने के लिए कैसा आसन देना है-शोफा, कुर्सी, मोढ़ा, चटाई, फर्श इत्यादि इत्यादि। यंत्र यह भी बताता है कि किसी व्यक्ति के उपयोग के बाद आसन को धोना है अथवा उसे नहीं धोना है। 


उच्चकोटि के कास्टोमीटर में कई खूबियाँ होती हैं। वे व्यक्ति के बदन में बसी सुगंध अथवा दुर्गंध को भी ताड़ लेते हैं। कुलीनता की महक से प्रयोग-कर्ता  की बत्तीसी खिल सकती है। वहीं अकुलीनता की बदबू से उनके नाक-भौं सिकुड़ सकते हैं, वी.पी. हाई हो सकता है। यदि आप विदेश जा रहे हों और आपके पास अपना कास्टोमीटर हो तो उसे घर पर ही छोड़ जाइए।  भारत के अलावा यह यंत्र संसार भर में कहीं उपयोगी नहीं है। हाँ! आप भारत में हों और कोई आपका नाम पूछे तो उसे अपना नाम बता दें। आपके उत्तर से  संतुष्ट न  हो और पूछे कि आप नाम के आगे या पीछे क्या लगाते हैं? तब आप तुरंत समझ जाइए कि उसके पास ख़ुफ़िया कास्टोमीटर है वह उसका  जल्द से जल्द उपयोग करना चाहता है। जब तक आपका सरनेम उसे पता नहीं लग जाएगा उसका कास्टोमीटर उसे चैन से बैठने नहीं देगा



7 टिप्‍पणियां:

  1. सुना है, कैस्टोमीटर की फैक्ट्री संसद भवन में है।

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  2. "Maulik soch hai Bandhu .kiske baithhne ke baad aasan ko dhaunaa hai ,kise kalaavati ke hisse kaa khaanaa khaanaa hai fir bhi kuleen khaanaa hai .
    badhaai Dandaji .
    veerubhai .

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  3. kaisto -meetar ko yah bhi bataanaa ,
    vartmaan bijooke (crow scare bar )ke baad ,bhaarat kaa "manmohan "kaun hoga -
    yuvraaj yaa GUMRAAJ.
    veerubhai

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  4. आजाद भारत में ही इसका चलन बढ़ा है.

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  5. पहली बार जाना है.सटीक व्यंग

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