19 जुलाई 2011

*****चाहने वाले उसके बुढ़ा जाएंगे

                -डॉ० डंडा लखनवी
पंगई        दंगई,       लुच्चई,     नंगई।
हर   जगह  बढ़  गई  आजकल  वाक़ई॥

अब   है  मौसम  का  कोई  भरोसा नहीं-
मार्च  में    जनवरी,  जनवरी   में   मई॥

भा   गया   हैरीपाटर   नई   पौध      को-
धूल   खाती    किनारे    कहीं  सतसई॥

जिसको  देखो  वो  सपने में ही बक रहा-
मुंबई,      मुंबई,         मुंबई,     मुंबई॥

राजा  दसरथ  अगर   आज  कोई   बना-
नोच  डालेगी   अब   की   उसे    केकई॥

गलियों-गलियों में करके सुना एमबीए.-
लड़की-लड़के   कहें   ले   दही,  ले  दही॥

प्यार     आहें     भरे  पहरेदारी    में  जो-
तो   मोबाइल  के  जरिए  मिले  चंगई॥

चाहने    वाले    उसके    बुढ़ा     जाएंगे-
नई   दिल्ली   रहेगी   नई    की    नई ॥


21 टिप्‍पणियां:

  1. हर बात पर तीखा प्रहार करती सटीक रचना.

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  2. "राजा दसरथ अगर आज कोई बना-
    नोच डालेंगी अब की उसे केकई॥"

    Sir,wakai behtareen kataksh dekhane ko mila hai.Atyant samyik avam vyangy se bharpoor rachana.

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  3. अब है मौसम का कोई भरोसा नहीं-
    मार्च में जनवरी, जनवरी में मई॥......
    परिवर्तन श्रृष्टि का नियम है,लेकिन वर्तमान में हो रहा यह परिवर्तन ही हमारे भविष्य का प्रतिबिम्ब नजर आता है,
    उपरोक्त प्रभावी रचना हेतु आभार व्यक्त करता हूँ......
    सादर..........

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  4. अच्छी तरह झकझोरा है लोगों को ,समझे तो बात बने।

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  5. "गलियों-गलियों में करके सुना एमबीए.-
    लड़की-लड़के कहें ले दही, ले दही॥"

    बहुत अच्छी व्यंग्य-रचना|बधाई एवं शुभकामनायें|

    -अरुण मिश्र

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  6. अब है मौसम का कोई भरोसा नहीं-
    मार्च में जनवरी, जनवरी में मई॥

    एकदम ठीक कहा...

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  7. हा हा हा। हंसी की फुहार और व्‍यंग्‍य की धार एक साथ। बहुत बढि़या।

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  8. भा गया हैरीपाटर नई पौध को-
    धूल खाती किनारे कहीं सतसई॥
    चाहने वाले उसके बुढ़ा जाएंगे-
    नई दिल्ली रहेगी नई की नई ॥
    वाह !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
    सत्य की धूप में ज्योंहि लाई गईं
    चम्पई सूरतें हो गई सुरमई.

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  9. जिसको देखो वो सपने में ही बक रहा-
    मुंबई, मुंबई, मुंबई, मुंबई॥

    अब तो मुंबई भे नहीं कहते बैंकाक, दुबई।

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  10. आपकी ये रचना वाकई
    छा गई ,छा गई ,छा गई ।

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  11. जिसको देखो वो सपने में ही बक रहा-
    मुंबई, मुंबई, मुंबई, मुंबई॥

    sateek vyang....

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  12. "राजा दसरथ अगर आज कोई बना-
    नोच डालेंगी अब की उसे केकई॥"
    BAHUT KHOOB , UMDA RACHNA .BADHAI

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