17 अगस्त 2010

आजकल किसको क्या कहा जाए.......

 (कुँवर कुसुमेश)
                             -कुँवर कुसुमेश

दौरे - मुश्किल    से   जो  बचा  जाए।
मुश्किलों    में    वही   फँसा    जाए॥

ये     उलट    फेर   का   जमाना    है-
आजकल  किसको क्या  कहा जाए॥

वक़्त     आँखें      तरेर     लेता     है-
कोई    हल्का -सा    मुस्करा  
जाए॥

ख़ुद   को   निर्दोष   प्रूफ  कर   देगा-
बस   इलेक्शन  का  दौर  आ 
जाए॥

तब   तलक   काम  है  निपट  जाता-
जब    तलक   कोई   सूचना   जाए॥

है  ’कुँवर’  इस  उम्मीद  पर  मौला-
ध्यान   तुझको  मेरा  भी  आ  जाए॥

पता -4/738-विकास  नगर,
लखनऊ-226022
सचलभाष-09415518546                                  

5 टिप्‍पणियां:

  1. सशक्त रचना से परिचय करवाने के लिए डॉ डंडा लखनवी को आभार...
    शुभकामनायें !

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  2. कुँवर कुसुमेश जी के ग़ज़ल से रु-ब-रु कराने के लिए शुक्रिया.

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  3. बेहतरीन ग़ज़ल...दिलचस्प अंदाज़ है कहन का..बेहद खूबसूरत...वाह
    नीरज

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  4. सुंदर प्रस्तुति!

    हिन्दी हमारे देश और भाषा की प्रभावशाली विरासत है।

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  5. डॉ डंडा जी को हार्दिक धन्यवाद ,कुंवर जी की गजल पढवाने के लिए
    ये आपने लाइम लाईट के नीचे कमेन्ट का आप्शन नहीं दिया ,वरना थोड़ा बहुत चूना हम भी लगा देते

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