10 अगस्त 2010

निज व्यथा को मौन में अनुवाद करके देखिए..............

                                                -डॉ० डंडा लखनवी


निज  व्यथा को मौन में अनुवाद करके देखिए।
कभी  अपने  आप  से   संवाद  करके   देखिए।।


जब   कभी   सारे    सहारे  आपको   देदें    दग़ा-
मन ही मन माता-पिता को याद करके देखिए।।


दूसरों  के   काम  पर  आलोचना   के    पेशतर-
आप वे  दायित्व खु़द पर लाद करके  देखिए।।


क्षेत्र-भाषा-जाति-मजहब  सब सियासी बेडि़याँ-
इनसे  अपने  आप  को  आजाद करके देखिए।।


हो  चुके  लाखों  तबाही  के  जहाँ में अविष्कार-
इनसे  बचने  का  हुनर  ईज़ाद  करके  देखिए।।


राजमद  में  झोपड़-पट्टी  रौंदने  में क्या  मज़ा-
मज़ा  तो  तब  है  उन्हें   इम्दाद करके देखिए।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. satish jee ke blog par comment ke tour par jo rachana thee vo padte hee aapka dwar khatkhataya..........
    ek ek panktee se 100% sahmat........
    ati sunder

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....सब मनन करने वाली ...

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  3. मेरे ब्लाग पर आगमन एवं सहज सम्मति हेतु आभार।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  4. जब कभी सारे सहारे आपको देदें दग़ा-
    मन ही मन माता-पिता को याद करके देखिए।

    बहुत अच्छी सलाह ! शुभकामनायें !

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  5. Thanks for dropping by at my blog...

    I got to know a great blog this way and your writing is very inspiring......the previous one about the youth and 'thagni maya' is so true...

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  7. बेहतरीन रचना !

    हो चुके लाखों तबाही के जहाँ में अविष्कार-
    इनसे बचने का हुनर ईज़ाद करके देखिए।।

    लाजवाब पंक्तियाँ ! एक से एक बढ़कर हैं ...

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  8. "जब कभी सारे सहारे ..." वाली पंक्तियाँ जीवनानुभव से तपी सोच की प्रतिश्रुति हैं|
    बहुत ही कमाल ....
    एकदम जैसे सूक्ति

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  9. अनुभव की आँच में तपी रचना पढ़ने का मौका मिला । धन्यवाद!

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  10. aadarniy sir,
    pahali bar aapke blog par aai hun.
    itani behatreen lagi aapki rachna .laga jaise ek-ek shabd bhar pur hai sachchai ka daman pakde haqikat ko bayan kar rahen hain. mere blog par
    aapka hardik abhinandan hai. sadar pranaam.
    poonam

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  11. aadarniy sir ,
    aap mere blog par aaye ,is baat ki
    muhje behad prasannta hai jise main shabdon me nahi bayan kar sakti.aap apna sneh mujh par apne aashishh ke roop me yun hi banaaye rakkhen.
    sadar pranaam-------poonam

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  12. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

    निज व्यथा को मौन में अनुवाद करके देखिए।
    कभी अपने आप से संवाद करके देखिए।।

    जब कभी सारे सहारे आपको देदें दग़ा-
    मन ही मन माता-पिता को याद करके देखिए।।

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  13. 07 August, 2010निज व्यथा को मौन में अनुवाद करके देखिए..............
    -डॉ० डंडा लखनवी


    निज व्यथा को मौन में अनुवाद करके देखिए।
    कभी अपने आप से संवाद करके देखिए।।


    जब कभी सारे सहारे आपको देदें दग़ा-
    मन ही मन माता-पिता को याद करके देखिए।।


    दूसरों के काम पर आलोचना के पेशतर-
    आप वे दायित्व खु़द पर लाद करके देखिए।।

    क्षेत्र-भाषा-जाति-मजहब सब सियासी बेडि़याँ-
    कभी इनसे आप को आजाद करके देखिए।।
    ...Garhre anubhavon se bhari hai aapki rachna.. bahut achha laga aapke blog par aakar..
    Haardik shubhkamnayne

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  14. इस ब्लाग पर आपका आगमन एवं सहज सम्मति हेतु आभार।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  15. आपकी टिपण्णी के लिए आपका आभार ...अच्छी कविता हैं...बहुत अच्छी .

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  16. जब कभी सारे सहारे आपको देदें दग़ा-
    मन ही मन माता-पिता को याद करके देखिए।

    waah

    matle ke bhaav bhi bahut pasand aaye

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