25 अगस्त 2010

संस्मरण - ममत्व की सूझबूझ

                            
(’सहज साहित्य’ नामक ब्लाग से साभार)

                





-डॉ० डंडा लखनवी





आज ’सहज साहित्य’ नामक ब्लाग पर पहुँच कर  डॉ हरदीप संधु –रामेश्वर काम्बोज‘हिमांशु’ की  छ: हाइकुओं में निबद्ध ’आटे की चिड़िया’ नामक  बाल- कविता को पढ़ने का अवसर मिला। उस सहज प्रभावकारी रचना को पढ़ कर बचपन की स्मॄतियाँ  मानसपटल पर तत्काल सजीव हो उठीं जिसे संस्मरण में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

सन ५१-५२ की बात है। उस समय हर घर में चूल्हे में लकड़ी की आँच पर रोटियाँ सेकी जाती थीं। मेरी माँ अब इस लोक में नहीं है वह भी उसी प्रकार रोटियाँ बनाती थी। रोटियाँ बनाते समय कभी-कभी वह आटे की चिड़िया बनाती, आग में भूनती और मुझे खेलने के लिए देती थी। चिड़िया रूप में आटे का बना यह एक खिलौना बालमन के लिए मनोरंजन का साधन हो जाता। मैं थोड़ी देर तक उस खिलौने से खेलता और बाद में उसे खा जाता था। उसके इस ममत्वपूर्ण व्यवहार में बड़ी गहरी सूझबूझ छिपी थी।

उस काल में जंकफूड का इतना प्रचलन न था; जितना कि आजकल है। सभी परिवारों में माताएं ताजा खाना बनाती थीं और पूरा परिवार तॄप्त होता था। संयुक्त परिवार में काम के बोझ के बीच यदि कभी भोजन में विलंब होता और बाल भूख से  आकुल होता था उस समय उसके पास यह एक अच्छा विकल्प था। ऐसा अब मुझे अनुमान होता  है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.
    हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसमें हमारे देश की सभी भाषाओं का समन्वय है।

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  2. पुरानी यादें वापस आयी .. रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!

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  3. आप सहृदय पाठक ही नहीं वरन् एक मँजे हुए साहित्यकार भी हैं । आपके शब्द प्रेरणा देने वाले हैं । ड़ॉ हरदीप अपने वतन से हज़ारों मील दूर उसी अनुभूत सत्य को पाठकों तक पहुँचा रही है आप जैसे मनोबल बढ़ानेवाले साहित्यकार बहुत कम हैं। बहुत -बहुत आभार ,डॉ साहब !
    आज रक्षा बन्धन है -दूर और पास की सभी बहनों को मेरा यह सन्देश- खिले हैं मन
    आज नेह का ऐसा
    दौंगड़ा पड़ा ।

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  4. रक्षा बंधन पर हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!!
    Dr. Sahib,
    Yehan main kuch correction karna chahtee hoon....un 6 Haikus main se Pahla mera likha hai aur bakee ke 5 Haiku Rameshver ji ne likhe hain.
    Main apne aap ko bhagyashalee mantee hoon ke mujhe aap aur Rameshver ji jaise Uch-kotee ke lekhakon se Ashreevad mil raha hai.
    Esee Aate ke chidya kee kahanee maine "Shabdon ka ujala" blog par bhee lgayee hai....kuch alag andaz se. Kabhee samya mile to padyega zaroor.
    Abhar!!!
    Hardeep
    http://shabdonkaujala.blogspot.com

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