04 अप्रैल 2010

दारू छुड़ा दीजिए

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                       -डॉ० डंडा लखनवी   

कल  शाम  क शराबी गया डाक्टर के पास।
थोड़ा वो परेशान था,   थोड़ा   था  बदहवास।।

बोला वो डाक्टर से- "नमन   है जनाब   को।
सुनता  हूँ  आप  जल्दी  छुड़ाते  शराब को।।"

तब   डाक्टर   ने   कहा कि लक्षण बताइए।।
"मैं नुस्खा लिख के दूंगा उसे आप   खाइए।।"

बोला शराबी-"प्लीज  आप  यह  न कीजिए।
थाने    में   बंद   दारू    मेरी     छुड़ा दीजिए।।"

7 टिप्‍पणियां:

  1. उसके लिए डाक्टर के पास जाने की क्या जरूरत थी...सीधे पुलिसवालों से ही सांठ गांठ कर लेते, वो कोन सा मना करते :-)
    बढिया प्रस्तुति!
    आभार्!

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  2. नमस्ते सर, मस्त लिखा हुआ है...बेहद मजा आया पढ़ के...:)

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  3. आनंद आया आज.

    मुझे याद है तक़रीबन १०-१२ साल पहले मैंने आपको एक पुस्तक में पढ़ा था. जिसका संयोजन व्यंग कवी प्रेम किशोर 'पटाखा' ने किया था. आज आपका ब्लॉग देख खुश हूँ.

    - सुलभ
    http://sulabhpatra.blogspot.com

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  4. सुलभ § सतरंगी जी!
    आपने सही फरमाया है।
    आपकी टिप्पणी से मुझे बल मिला।
    धन्यवाद! -डॉ० डंडा लखनवी

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  5. saadar namaskaar...
    vats ji ki baat me dum hai vaise hi jaise ki aap ke vayangya me...

    kunwar ji,

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