04 जुलाई 2010

मज़बूरी

                                       -डा० सुरेश उजाला



लाचार-मज़बूर-अशक्त
असहाय -विवश-कमजोर
दीन-हीन-बेबस आदि
नाम हैं-मज़बूरी के |

क्योंकि-
मज़बूरी-
करा देती है-
सब कुछ
दुनिया में |

पहना देती है-
उतरन
खिला देती है-
जूठन |

कर देती है- नंगा
उतारू-
बुरे से बुरे
काम करने को
बना देती है अधीन
दूसरों की
हाँ में हाँ मिलाने को |


जिसके कारण-
खो बैठता है-
स्वाभिमान
आदमी-शनै:-शनै: |

और
हो जाता है ग्रसित
हीन भावना से |

अतएव
मज़बूरी नाम है-
मज़बूर का-
दासता का-
धरती पर |
                     ////////////////////
108-तकरोही, पं० दीनदयाल पुरम मार्ग,
इंदिरा नगर,
लखनऊ-226016,   सचलभाष-09451144480

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपने रचना पढ़ी और उस पर बेबाक टिप्पणी की, धन्यवाद । - उजाला

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  2. मंगलवार 06 जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. और व्यर्थ बदनाम करने लग जाते हैं लोग उदाहरण देते हुए बापू का "मजबूरी का नाम महात्मा गांधी"। सुन्दर रचना।

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