22 जून 2010

कवि सम्मेलनी संस्मरण : जब बैसाखी आती है........





4 टिप्‍पणियां:

  1. कैसे कैसे संयोजक और कैसे कैसे कार्यक्रम...ये संस्मरण भी खूब रहा.

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  2. रचना पढने को तो मिली या वो भी नहीं। अच्‍छा रहा दिल्‍ली प्रवास।

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  3. ये भी खूब रही... मेरा मतलब जो परेशानी हुई वो तो सिर्फ आप ही जानते हैं

    याद बैसाखी की आती रहेगी और दिल्ली के दलालों की भी.

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