28 अगस्त 2011

दोहों के आगे दोहा

                          -डॉ० डंडा लखनवी
अभिनायक  करने लगे, जब नायक के रोल।
नाटकीयता  बढ़  गई, मूल्य  हो  गए गोल॥
अभिनेताओं   को  लगे, नेताओं   के  शौक़।  देशी घी  की जगह पर, केरोसिन की छौंक
 

9 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन
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    कल 29/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. @नाटकीयता बढ़ गई, मूल्य हो गए गोल॥

    बेहतरीन.

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  3. बहुत सुंदर अभिब्यक्ति /ब्यंग करती हुई शानदार रचना /बधाई आपको /




    please visit my blog.thanks.
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  4. मेरे ब्लॉग पर आकर टिप्पड़ी करने के लिए आभार /आशा है आगे भी आपका सहयोग मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा /शुक्रिया /


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  5. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

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